भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप), नई दिल्ली द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में सुधार एवं नवाचारों को बढ़ावा देने तथा उन्हें व्यापक स्तर पर अपनाने के उद्देश्य से 17 सितंबर से 17 अक्टूबर, 2026 तक ‘रिफॉर्म उत्सव’ मनाया जा रहा है । इसी क्रम में भाकृअनुप - भारतीय जल प्रबंधन संस्थान, भुवनेश्वर, ओडिशा में संस्थान के निदेशक डॉ. अर्जमादत्त षड़ंगी के कुशल नेतृत्व में 8 अक्टूबर, 2026 को हाइब्रिड माध्यम से पैनल चर्चा आयोजित की गई । पैनल चर्चा का विषय “विकसित भारत @ 2047 की दिशा में कृषि जल प्रबंधन के मुख्य मुद्दे और उनके समाधान” था । चर्चा में विशिष्ट जल विशेषज्ञों के रूप में डॉ. सुरेश आत्माराम कुलकर्णी, सेवानिवृत्त सचिव, महाराष्ट्र जल संसाधन नियामक प्राधिकरण तथा डॉ. मान सिंह, भूतपूर्व परियोजना निदेशक, जल प्रौद्योगिकी केंद्र, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया । इस अवसर पर डॉ. षड़ंगी ने वर्तमान में कृषि जल प्रबंधन से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डाला और संस्थान चल रही विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों के बारे जानकारी दी । उन्होंने बताया कि जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कृषि की उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक है । कृषि जल प्रबंधन के अनुसंधान का उद्देश्य प्रति जल बूंद से अधिक फसल की जगह प्रति जल बूंद से अधिक आय होना चाहिए, ताकि हमारे देश के किसान फसलों की अधिक जल उत्पादकता साथ-साथ कृषि से आय भी प्राप्त कर सकें। डॉ. कुलकर्णी ने बताया कि पिछले 20 वर्षों में नहरी सिंचाई के क्षेत्रफल में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाई है । इसका प्रमुख कारण नहरों के अंतिम छोर तक किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध न होना है । उन्होंने कहा कि देश में नहरों के माध्यम से सिंचाई जल का समान वितरण सुनिश्चित करना आवश्यक है । इस समस्या के समाधान के लिए खेत स्तर पर सिंचाई जल की आवश्यकता और उपलब्धता का उचित निर्धारण किया जाना चाहिए । डॉ. सिंह ने कहा कि मानसून के बाद की अवधि के लिए जल बजट का आकलन करना अत्यंत आवश्यक है । उन्होंने बताया कि अभी तक जल को आर्थिक दृष्टि से पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है । उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि फसल विविधीकरण काफी हद तक जल की उपलब्धता पर निर्भर करता है । इसलिए किसानों की आवश्यकताओं के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के लिए जल को भी प्राथमिकता देना आवश्यक है । चर्चा के समापन अवसर पर प्रधान वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश वर्मा ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत की आधारशिला केवल पर्याप्त जल की उपलब्धता पर नहीं, बल्कि जल के विवेकपूर्ण, समान और टिकाऊ उपयोग पर निर्भर करेगी । कृषि में प्रत्येक बूंद का अधिकतम उपयोग करते हुए उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आवश्यक है । विकसित भारत के निर्माण के लिए किसानों को वर्षा आधारित कृषि से जल-सुरक्षित कृषि की दिशा में आगे बढ़ना होगा । इसके लिए प्रभावी और ठोस जल प्रबंधन उपायों को अपनाना समय की आवश्यकता है।